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आ के वाबसता हैं | Faiz Ahmed Faiz - The Season Finale - Khayal

Radio Nasha

ख़ास अन्दाज़ जब सुखन का ना हो शायरी, शायरी नहीं होती। वेद राही जी का ये शेर उतना ही ख़ूबसूरत हैं , जितना की सच। इसलिए हम लाए हैं तमाम दुनिया के शायर ां और शायरों के ख़्वाब-ओ-ख़याल, सिर्फ़ रेडियो के बच्चन (@radiokabacchan) की आवाज़ में। रोज़ सुबह उठिए एक नए जज़्बे, एक नए ख़याल के साथ। आप सुन रहे हैं एच टी स्मार्टकास्ट और ये है रेडियो नशा प्रोडक्शन |...

Khayal
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